ओडिशा

सिल्कूटा जंगल में हथियारों का जखीरा बरामद

Kavita2
24 Aug 2026 12:40 PM IST
सिल्कूटा जंगल में हथियारों का जखीरा बरामद
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राउरकेला। आत्मसमर्पण कर चुके माओवादियों से पूछताछ के दौरान मिली गुप्त सूचना के आधार पर राउरकेला पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। सुंदरगढ़ जिले में राउरकेला जिला पुलिस के के. बालांग थाना क्षेत्र के सिल्कूटा रिजर्व फॉरेस्ट में सुरक्षा बलों ने तलाशी अभियान चलाकर माओवादियों द्वारा छिपाकर रखे गए हथियार, गोला-बारूद और विस्फोटक सामग्री का जखीरा बरामद किया है। बरामदगी के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने इलाके में अपनी गतिविधियां और निगरानी बढ़ा दी है।

पुलिस के अनुसार, आत्मसमर्पण कर चुके माओवादियों से की गई गहन पूछताछ में जंगल में छिपाकर रखी गई प्रतिबंधित संगठन से जुड़ी सामग्री के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिली थी। इसी सूचना को आधार बनाकर सुरक्षा बलों ने सिल्कूटा रिजर्व फॉरेस्ट में सघन तलाशी और एरिया डोमिनेशन अभियान शुरू किया। अभियान के दौरान जंगल के एक सुनसान और छिपे हुए हिस्से में संदिग्ध सामग्री का पता चला।

डीवीएफ और बीडीडीएस की संयुक्त कार्रवाई

अभियान को राउरकेला पुलिस के डिस्ट्रिक्ट वॉलंटरी फोर्स (डीवीएफ) और बम निरोधक दस्ता (बीडीडीएस) की संयुक्त टीम ने अंजाम दिया। जंगल का इलाका संवेदनशील होने के कारण तलाशी अभियान के दौरान सुरक्षा और सावधानी को प्राथमिकता दी गई। संदिग्ध वस्तुओं की पहचान के बाद बम निरोधक दस्ते की मदद से उन्हें सुरक्षित तरीके से कब्जे में लिया गया।

पुलिस की इस कार्रवाई को माओवादी गतिविधियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान की महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। सुरक्षा बलों का उद्देश्य जंगल के उन इलाकों में छिपाई गई सामग्री का पता लगाना है, जिनका इस्तेमाल प्रतिबंधित संगठन द्वारा सुरक्षा बलों के खिलाफ गतिविधियों या अपने नेटवर्क को संचालित करने के लिए किया जा सकता था।

जंगल में छिपाकर रखा गया था सामान

तलाशी अभियान के दौरान जंगल के एक छिपे हुए हिस्से से हथियार, गोला-बारूद, विस्फोटक सामग्री और माओवादी साहित्य बरामद किया गया। इसके अलावा माओवादी शिविर से जुड़ी विभिन्न सामग्रियां भी सुरक्षा बलों के हाथ लगी हैं।

बरामद सामग्री की विस्तृत जांच की जा रही है। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि यह सामग्री कितने समय से जंगल में छिपाकर रखी गई थी और इसे वहां तक पहुंचाने में किन लोगों की भूमिका थी। बरामद सामग्री का इस्तेमाल किसी माओवादी गतिविधि के लिए किया जाना था या इसे लंबे समय से सुरक्षित स्थान के रूप में रखा गया था, इसकी भी जांच की जा रही है।

आत्मसमर्पण कर चुके माओवादियों से मिली अहम जानकारी

पुलिस के लिए इस कार्रवाई की खास बात यह है कि बरामदगी आत्मसमर्पण कर चुके माओवादियों से मिली सूचना के आधार पर हुई। सुरक्षा एजेंसियां लंबे समय से माओवादी संगठन से जुड़े लोगों को मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रोत्साहित कर रही हैं। आत्मसमर्पण करने वाले पूर्व माओवादियों से पूछताछ के दौरान जंगलों में मौजूद पुराने ठिकानों, छिपाई गई सामग्री और संगठन के नेटवर्क से जुड़ी जानकारी मिलने की संभावना रहती है।

इसी तरह मिली जानकारी को सुरक्षा बलों ने अभियान में इस्तेमाल किया और सिल्कूटा रिजर्व फॉरेस्ट में तलाशी अभियान चलाया। इससे सुरक्षा एजेंसियों को जंगल में मौजूद माओवादी नेटवर्क से जुड़े संभावित ठिकानों के बारे में आगे भी महत्वपूर्ण सुराग मिलने की उम्मीद है।

एरिया डोमिनेशन अभियान जारी

सिल्कूटा रिजर्व फॉरेस्ट और आसपास के संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बलों की ओर से एरिया डोमिनेशन अभियान चलाया जा रहा है। इसका उद्देश्य जंगल के उन हिस्सों की पहचान करना है, जहां माओवादी गतिविधियों से जुड़ी सामग्री या पुराने शिविर मौजूद हो सकते हैं।

हथियार और विस्फोटक बरामद होने के बाद सुरक्षा बलों ने इलाके में अतिरिक्त सतर्कता बरती है। जंगल के दुर्गम क्षेत्रों में तलाशी अभियान के दौरान सुरक्षा बलों को कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे इलाकों में किसी भी संदिग्ध वस्तु को बेहद सावधानी से जांचना जरूरी होता है।

माओवादी नेटवर्क पर बढ़ रहा दबाव

सुंदरगढ़ और आसपास के जंगल क्षेत्र लंबे समय से माओवादी गतिविधियों की दृष्टि से संवेदनशील रहे हैं। सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई और अभियान के कारण प्रतिबंधित संगठन पर दबाव बढ़ा है। आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों की संख्या बढ़ने से सुरक्षा एजेंसियों को संगठन के पुराने नेटवर्क और गतिविधियों से संबंधित जानकारी भी मिल रही है।

पुलिस का मानना है कि जंगलों में छिपाए गए हथियारों और विस्फोटक सामग्री की बरामदगी से माओवादी गतिविधियों को कमजोर करने में मदद मिलेगी। ऐसे जखीरे के मिलने से संभावित हिंसक गतिविधियों को रोकने में भी सुरक्षा बलों को महत्वपूर्ण सफलता मिलती है।

बरामद सामग्री की जांच में जुटी एजेंसियां

पुलिस ने बरामद हथियारों, विस्फोटकों, गोला-बारूद और अन्य सामान को जांच के लिए सुरक्षित कर लिया है। सुरक्षा एजेंसियां बरामद सामग्री की प्रकृति और उसके संभावित इस्तेमाल की जांच कर रही हैं। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि सामग्री माओवादी संगठन के किस नेटवर्क से जुड़ी थी।

माओवादी साहित्य और शिविर से जुड़ी सामग्री भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इससे संगठन की गतिविधियों, पुराने ठिकानों और क्षेत्र में उसकी मौजूदगी से जुड़े सुराग मिल सकते हैं। जांच के आधार पर आगे और तलाशी अभियान चलाए जाने की संभावना है।

सुरक्षा बलों के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि

सिल्कूटा रिजर्व फॉरेस्ट में हुई यह बरामदगी राउरकेला पुलिस और सुरक्षा बलों के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। आत्मसमर्पण कर चुके माओवादियों से मिली सूचना को कार्रवाई में बदलकर सुरक्षा बलों ने जंगल में छिपे एक बड़े जखीरे का पता लगाया है।

पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों की प्राथमिकता अब इलाके में शांति और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना है। इसके लिए संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी और तलाशी अभियान आगे भी जारी रहने की उम्मीद है। साथ ही आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों से प्राप्त सूचनाओं के आधार पर माओवादी नेटवर्क से जुड़े अन्य संभावित ठिकानों की भी पड़ताल की जा सकती है।

इस कार्रवाई ने एक बार फिर यह संकेत दिया है कि सुरक्षा बल माओवादी गतिविधियों के खिलाफ लगातार अभियान चला रहे हैं। सिल्कूटा जंगल से हथियार, विस्फोटक और अन्य प्रतिबंधित सामग्री की बरामदगी से क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

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